तनहा हो तुम , तनहा मै भी ,
आओ मिलकर इस तन्हाई को मिटा दे
दूर से ही दिखाती है जो , उस
गम की परछाई को मिटा दे !
जुदा तुम भी हो , जुदा मैं भी
आओ मिलकर अपनों की जुदाई मिटा दे ,
फूटी है गर किस्मत तो हंसकर
किस्मत की इस रुसवाई को मिटा दे !
आओ मिलकर इस तन्हाई को मिटा दे !
इंतजार तुम्हे भी हैं इंतजार मुझे भी
आओ मिलकर वक्त की लम्बाई मिटा दे
प्यार तुम्हे भी है , प्यार मुझे भी
आओ मिलकर परम्परा की खाई मिटा दे
दूर से ही दिखाती है जो उस
गम की परछाई को मिटा दे
----------------------सुप्रीत
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