पाँव पसारता कोरोना और लापरवाह हम




“लोग फालतू के टेंशन ले ता, हमनी के ना होई ई कोरोना” , “कोरोना होखे के होई त केतनो लुका जा घर में, होईये जाई”, “कब तक ले ढुकल रहब घर में डरपोक आदमी, निकलल कर बाहरो तनी”, ऐसे ही तमाम किस्म की बातों से मनोरंजन होता रहता है जब भी कोई आस पास का इन्सान मुझे छत पर अकेला टहलते देखता है| सोचता हूँ ऐसे वैश्विक महामारी में भी लोग कितने लापरवाह हैं| माना आपको उपरवाले का आशीर्वाद प्राप्त है, आप सुरक्षित हैं| शायद आपको कभी कोरोना नहीं हो सकता| लेकिन आप जो हर जगह घूम घूम कर और लोगों को घर से बहार बेवजह घुमने की सलाह दे कर जो समाजसेवा कर रहे हैं ना, वो मेरी नज़र में सिर्फ बेवकूफी और लापरवाही ही नहीं बल्कि गुनाह है| एक बात और, अगर होना ही है कोरोना तो कितना भी बचने का प्रयास करूं हो ही जाएगा इसका मतलब ये बिलकुल ही नहीं कि इससे बचने की कोशिश ही ना करूं|

बहुत दिन हो चुके हैं मुझे घर से बहार निकले| शायद ये वक़्त ख़ुद से बातें करने की है| अमूमन मैं बहुत देर तक घर से बहार लोगों के बीच हीं रहता था| कुछ ज्यादा ही सामाजिक हूँ मैं| अब तो लगता है एक ज़माना बीत गया मुहल्ले के दोस्तों के साथ तफरीह किये| बहुत याद आतें हैं वो दिन और बहुत मन करता है बहार जा कर घूम आऊँ| थोड़ी मौज मस्ती भी ज़रूरी है जिंदगी में| फिर सोचता हूँ जिंदगी रहेगी तो मौज मस्ती करने के बहुत अवसर मिलेंगे और अपने इरादों को भविष्य के लिए छोड़ कर ख़ुद को कैद कर लेता हूँ अपने ही घर में|

लेकिन हर कोई ऐसे नहीं सोचता| मेरे जैसे बहुत सारे लोग सामाजिक दुरी बनाने में सफल रहें और बहुत सारे लोग असफल| नतीजा ये हुआ कि आज कोरोना हमारे कमज़ोर इक्षाशक्ति के सामने जीतता दिख रहा है| हर रोज़ कोरोना के नए मरीज़ सामने आ रहे हैं| क्या इतना मुश्किल है कोरोना को हराना? हमे तो बस अपनी अपनी ज़िम्मेदारी निभानी है| सामाजिक दुरी बना कर रखना है, और हमेशा सचेत रहना है|

अगर अपने मुहल्ले की बात करूं तो जब से प्रधानमंत्री जी ने देश में सम्पूर्ण लॉकडाउन की घोषणा की तब से देखता आ रहा हूँ, बहुत सारे लोग कभी सचेत थे ही नहीं| किसी को अपने दुकान से कमाई की चिंता थी और लॉकडाउन में भी कमाने में लगे थें, किसी को अपने घर बनवाने की जल्दी लगी थी, उसे पूरा कराने में लगे थें| कुछ लोग अपने मित्रों से इतना लगाव रखते हैं कि उनसे दुरी बर्दास्त ही नहीं कर सकते| उन्होने न सिर्फ ख़ुद को बल्कि इस क्षेत्र के तमाम लोगों को कोरोना से संक्रमित होने का मौका दिया| उपरवाले की कृपा से लॉकडाउन के दौरान कुछ गड़बड़ नहीं हुआ| लेकिन अब क्या? अब जबकि कोरोना अपने पाँव पूरी तरह से हमारे शहर में पसार रहा है, ऐसे में भी क्या जोख़िम उठाना सही है?

दुकानदार सैनीटाईज़र का प्रोयोग भी कर रहे हैं, लोग फेस मास्क या किसी भी कपडे से अपने नाक मुह ढक ही रहे हैं, फिर क्यों ऐसा हो रहा है? अभी अभी एक समाचार पढ़ा जिसके अनुसार मेरे घर के पास (आर्य समाज रोड) एक और कोरोना संक्रमित पाया गया| सात दुकानदार भी हमारे शहर में नए नए कोरोना संक्रमित हो चुके हैं| डर लगता है अब| वो लोग जिन्हें लगता है वो कोरोना संक्रमित नही हो सकतें, उनकी लापरवाही कही भाड़ी न पड़ जाए|

सामाजिक दुरी की धज्जियाँ उड़ा कर अगर आप फेस मास्क पहनते भी हैं तो क्या फायदा| चेहरे पर मास्क और गले में हाथ डाले या पास पास बैठ कर मण्डली जमाते ये जो लोग नज़र आते हैं ना, गुस्सा आता है उनपर| अच्छा कुछ लोग तो और भी विचित्र हैं| मास्क को गले में पहनकर सिर्फ दिखावा करने वाले लोग, ऐसे लोगों को देख कर अमर्यादित शब्दों का प्रयोग ना कर पाऊ, उपरवाला मुझे इतनी शक्ति दे, बस|

लॉकडाउन में बच्चे बड़े परेशान हैं| इस उम्र में दिन भर घर पर ही रहना और छुट्टियों जैसे माहौल में सब्र रख पाना उनके लिए भी बहुत कठिन है| उनके माता पिता की ज़िम्मेदारी बनती है उन्हें घर पर ही मनोरंजन देने और व्यस्त रखने की| लेकिन क्या सच में ये ज़िम्मेदारी सभी लोग उठा रहे हैं? हर रोज़ सड़कों पर मोहल्ले के बच्चों का हुडदंग देखता हूँ| अच्छा भी लगता है कभी कभी और कभी कभी बुरा भी लगता है| बच्चों को ऐसे जोख़िम में डालना गलत है|

सच बताऊ तो मुझे मेरी फ़िक्र तो है लेकिन मुझसे ज्यादा मेरे माता पिता की फ़िक्र है| उन्हें सुरक्षित रखने के लिए मुझे भी सुरक्षित रहना पड़ेगा| और शायद यही ख्याल मेरे अन्य घर वालों का भी है| वो लोग जो ख़ुद बेफिक्र घूम रहे हैं, जिन्हें देखकर उनके घर वाले भी बेफिक्र घूम रहे हैं, वो सभी सिर्फ एक घर को नहीं बल्कि पुरे समाज को जोख़िम में डाल रहे हैं| वो लोग जो सामाजिक दुरी से दूर हैं, वो लोग जो सरकार के आदेशों का पालन नहीं कर रहे हैं, वो लोग जिन्हें लगता है उन्हें कोरोना नहीं हो सकता, अब भी वक़्त है, संभल जाओ ना| जिसको कोरोना हो गया उसको रोना ही है| बाद में पछताने से क्या फायदा होगा? साथ दो लड़ने में कम से कम| बेवजह घूम कर क्या मिलेगा अगर कुछ गलत हो गया तो? आज दूर रह लो सबसे ताकि कल सब के साथ नयी कहानी लिख सको|


Comments

Hajari said…
सच्ची बात सुप्रीत भाई������. बात जागरूक होने की और होशियारी दिखाने की है। अगर अपने आपको हाथी समझेंगे तो कोराना चींटी की तरह ही वार करेगा।।
हमे सैनिटाइजर, मास्क रूपी सुरक्षा कवच को हमेशा युद्ध के लिए तैयार रखना चाहिए।
Achintya said…
Gajab maharaj 🙏🙏 gajab ye kavita karanti kaari hai
ATHAR RIZVI said…
Bahut sahi message....Superbb!!
Unknown said…
Bhut badhiya likhe hai sir
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😂😂😂😂😂😂😂👌 nice
mayank said…
Superb keep writing
Unknown said…
बहुत ही सही और उम्दा भाई ।।।।।
Hemendra Singh said…
Yes you are right ....but hero don't see the empty side of glass......look most of people following precaution for covid-19
Archana Kishore said…
सही बात है
Amir said…
Kamaal ka likhte hain aap.. .
Swati's Blogg said…
बहुत अच्छा लिखा है आपने। मुझे भी डर लगता है और कुछ लोग जिन्हें डर नहीं लगता उन्हें देखकर मैं भी यही सोचती हूँ कि अपनी न सही अपने घरवालों की तो फ़िक्र कर लेते।
और अब ये जितनी तेजी से बढ़ रहा हमारा जागरूक रहना और भी ज़रूरी होता जा रहा।
Unknown said…
बेहतरीन!
bavika said…
Kabeeliyat tareef bhaia, sab se zyada corona ka gaav me phuchna khatra hai kyu ki vha ki health system se hm sb log vakif hai, par ab shayad phuch chuka hai, sarkar ki corona facility se phle yaha LED phuch jata hai, agar govt. Election ko jitna serious leti h utna corona ko leti toh hm sb kafi hadd se behtar hote.. Par ye koi nayi sankat nahi hai jiske chapet me majdoor gareeb aare hai, hme sirf apne zimmedaari ka kaam karna hai. 👍
Unknown said…
बहुत अच्छा लिखा है आपने भैया......
Roshan"s said…
Best content brother,your writing is always worth reading,Kudos!!!
Roshan"s said…
It's high time people should be aware of consequences
Ekta said…
Completely agree...