केतना साल हो गइल भाईवा आज़ादी के? ई सवाल हो सका ता तनी बुड़बक नियर लागी रउवा। कोनो बात नइखे। हम त अइसे ही पूछ लेनी ह। रउवा बुझा ता कि ढेरे साल से आपन देश आजाद बा त इहे बात रहल। आ बाकिर हमरा तनी उझ-बीझाहट होला हर साल सुन सुन के कि हई हमनी के आज़ादी के जश्न मनाव तनी स। हर साल 14 अगस्त के टेलीविजनवा पर जे समाचार पढेला उ एक बार जरुरे कहेला कि दिल्ली में आतंकवादी घटना के शक बुझा ता त सरकार सुरक्षा बढ़ा देले बा। हई हर साल जब डर डरे के झंडा फहरावे के बा त आज़ादी कईसन? आ छोड़ी ई बात के, ई त छोट-मोट बात बा। तनी मुद्दा आला बात आगे लिख तनी। पढ़ी आ बताईं केतना आजाद बानी रउवा।
एगो रहले ह गांधी जी मने आपन बापू, राष्ट्रपिता, ओरिजिनल आला गांधी जी। मर्दे एकदम उस्ताद आदमी। हथवा में डंडा पकड़त रहलें बाकिर कभी जे गलतीओ से ऊ डंडा चलवले होकस। ना, कभियो ना। अपना पास एगो चरखा रखत रहलें, आपन कपड़ा सूत से खुदे बनावत रहलें। आत्मनिर्भर भारत के असल नीव त ऊहे रखले रहस। आ देखीं, बिन डंडा चलवले अइसन चरखा चलवलस ऊ जवान के अंग्रेजन स के आपन देश भागे के पड़ल। माने कि 15 अगस्त के खाली अंग्रेजन स भारत छोड़ के चल गइल। अब एकरा के आजादी के जश्न के रूप में याद करीं आ चाहें आपन बर्बादी के शुरुवात के रूप में। अब ईहाँ रउवा हमरा पे शक करल शुरू कर देम। कोनो बात नइखे। आगे पढ़ी।
जबले अंग्रेजन स से हमनी के लड़ाई रहे हमनी के अपना आप के बड़ा फक्र से हिंदुस्तानी कहत रही स। जय हिंद आ इंक़लाब ज़िंदाबाद इहे नारा रहे। हिन्दियो रहे आ उर्दुओ रहे। आज़ादी का मिल गइल अंग्रेजन स से हमनी के बटवारा शुरू हो गइल। जादा ना बोलेम ई मुद्दा पर। रउवा बुड़बक थोड़े बानी। समझते बानी सब चीज़। का भइल ओकरा बाद आ आज तक का होत चलल आवता एकरा पर ज्ञान बांचे के कोनो ज़रूरत नइखे बुझात हमरा। हिंदुस्तानी त ना बाकिर हिन्दू मुस्लिम सिख ईसाई सब लोग बा अपना देश में। 15 अगस्त 1947 से हमनी के गुलाम हो गइनी स आपन धर्म के। एकरा आगे कुछो ना। आगे पढ़ी।
73 साल हो गइल। का का भइल ई पिछला 73 साल में ओकरा बारे में बात कर के हम राउर समय ना लेम। देखल जाओ त 73 साल में बर्बादी के अलग अलग किस्सा लिखल गइल। सभ्यता संस्कृति छोड़ी पूरा के पूरा इतिहासे बदल देवल गइल बा। कभीयो हक़ के नाम पर त कभियो बराबरी के नाम पर, सरकार के केतना बार कानून बनावे के पड़ल बा ई त सरकार आ हमनी के जनता स जानते बानी। आखिर काहे ला बनावे के पड़ल हेतना कानून? एकर जवाब त ढूंढेहे के पड़ी। ढूंढेम कहियो फुरसतहा से। चलीं तनी आजकाल के का हिसाब बा ओकरा पे ध्यान लावे के परयास कर तनी। आगे पढ़ीं।
बात करेम सबसे पहिले शिक्षा के। सोचीं जोना देश में हर कोई पढ़ सको ओकरा खातिर Right to Education माने कि शिक्षा के अधिकार नाम से कानून लावे के पड़े ऊ देश के जनता केतना आज़ाद होई। लोग के सोचे अइसन बा कि ई कानून लावे के पड़ल सरकार के। आ कहल जाला कि एगो लईकी पढ़ी त एगो पूरा समाज के शिक्षित बनाई। खाली कहले जाला, होला कुछो ना। हमनी के देश में त लईकी सं के पढेओ खातिर लड़ाई लड़े के पड़े ला। एकरा के आज़ादी कहेम रउवा। दसवाँ ले पढ़ ले ले बिया, बियाह में दिक्कत न होई, इहे त सोच बा केतना लोग के। हर साल जब मैट्रिक आ इंटर के बोर्ड के रिजल्ट जब आवेला त सभे अखबार आ न्यूज़ चंनेलवा पर एके बात रहेला "लड़कियों ने मारी बाजी", सही बा। हर साल ढेर लईकी सँ पास होली सँ। टॉपर होली सँ। आ ओकरा बाद? जब हेतना लईकी पास कर तरी सँ त आगे जा के ओकनी के नाम काहे ना आवे ला? पढ़ाई रुक जात होई ओकनी के होतने पर। का कहेम एकरा? आज़ादी? सरकार बा कि मुफ्त में पढ़ाव ता, कपड़ा आ साईकलो देता लेकिन केतना अफसोस के बात बा कि मौके ना मिले ला जादा पढ़े के। अधिकारे नइखे। आजादी कहे के चाह तनी त कह लीं एकरा आजादी। आगे पढ़ीं।
आजकाल एगो बड़ा क्रांतिकारी चीज़ आइल बा, सोशल मीडिया। मने कि का कहल जाओ एकरा बाड़े में, गजबे के बा ई। कभियो रउवा एगो चिट्ठी नियर कुछो लिख के हउ चिड़िया आला पर डाल देम आ ओकरा बाद देखीं कमाल। ऊ चिड़िया उड़त उड़त ट्वीट ट्वीट कर के राउर बात सबनि के सामने रख दी। ढेरे लोग पढेला ऊ चिट्ठीया के। का सच बा का झूठ हेतना समझे के फुरसत नइखे। मोबालिया पर इंटरनेट त आजकाल सभे के पास बा। फेसबुक आ व्हाट्सएप त सभे लोग लगभग चलावते बा। का का पोस्ट होता ओमें केतना सच्चाई बा ई जानल ज़रूरी न समझे ला केहुओ। फेक न्यूज़ फैइलावे के बा त सोशल मीडिया एकदम गर्दा मचा दी ई काम में। जेकर जइसन सोच बन गइल बा ओकरा ऊहे हिसाब से सच्चाई समझ में आई। असली सच त लुक्का छुपी में जैसे एगो लुका ना जाला के ढूंढत रह, खेला ख़तम हो जाई लेकिन ऊ न मिली ओहिंग लुकाइल रहेला। आ बाहर होता तमाशा। हमनी के आपन सोच के गुलाम हो गइल बानी सँ। आगे पढ़ीं।
अब देखीं एगो बड़ा ज़बरदस्त बात बताव तनी। आपन देश में 'भारत माता की जय' कहे आ कहवाये खातिर राजनीति होला। केहू कह देलस भारत माता की जय त बवाल हो जात रहे। आजादी कहेम रउवा एकरा के? 15 अगस्त आ 26 जनवरी आ 2अक्टूबर इहे दिन बा जब हमनी के देश में लोग देशभक्ति गीत सुनेला। बाकी दिन त बड़ले बा राजनीति ला। सरकार के आदेश आइल के सिनेमाघर में फिलिम शुरू होखला के पहिले राष्टगान होई, माने कि 'जन गण मन'। आहे हो दादा, एकरो पर बवाल हो गइल हो। माने कि एको मिनट देश खातिर केहू ना दे सकेला इहाँ। आ लोग देश के आज़ादी मनाई। आगे पढ़ीं।
कुछ साल पहिले देखनी हम एगो कांड। कुछ लोग रहे जे आपन मुद्दा रखत रहे। विद्यार्थीये लोग रहे देश के बड़ा प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय के। 'हम क्या चाहें आजादी, पूंजीवाद से आजादी' आ अईसने ढेरे नारा लागत रहे। ठीक बा, विचारधारा के बात बा, सही बा। सोचे आला बात इहाँ ई बा कि अइसन का हो गइल ऊ लोगन के साथ कि अईसे आज़ादी मांगे के पड़ ता। इहो सोचाई कोनो दिन, अभी ना। बाकिर आज़ादी मांगते मांगते का का नारा लाग गइल रऊआ लोग त जानते बानी। एक बात हमहुँ मानेम कि अपना देश में बोले के खूब आज़ादी बा। जोना देश में रऊआ रह तनी, जोना देश के खा तनी ओकरे टुकड़ा टुकड़ा करे के नारा अगर लगा सक तनी त बोलला के त ढेरे आजादी बा। कोनो सरम लिहाज नइखे कि का कह तनी। बवाल भइल तनी सा, पुलिस के भेजे के पड़ल। कांड त तब भइल जब फिलिम के स्टारलोग, राजनेता लोग पहुँच गइल लोग सपोर्ट करे अइसन नारा लगावे आला लोग के बचावे खातिर। लीं अब, का बोलेम, केकरा के बोलेम। देश बंट गइल फेरु से दू भागा में। अब कुछो बोलनी रउवा त चाहें अंधभक्त कहलएम आ चाहें गद्दार। राउर बात के बिरोध करे आला ढेर लोग मिली। आ बाकिर बोले के त बा। देश के बात ह। आपने देश में देश के अखंडता के लड़ाई लड़े के पड़ता। कईसन आजाद बा हो ई। आगे पढ़ीं।
.............. To be continued
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